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Sunday, 22 March 2020

कृषि : विभिन्न विषयों के जनक


नमस्कार, मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है। आज हम कृषि में खोजें गये विभिन्न विषयों आविष्कार तथ्यों आदि के जनक ओर खोजकर्ता के बारे में जानकारी साझा कर रहे हैं। जोकि निम्न प्रकार हैं। 

कृषि विभिन्न विषयों के जनक

   विषय            -       जनक ( खोजकर्ता)
एग्रीकल्चर के जनक : अल्बर्ट हावर्ड

आधुनिक एग्रीकल्चर के जनक : नार्मन अर्नेस्ट बोरलाग

एग्रोनोमी के जनक : पित्रो डेक्रजेन्सी 

जनेटिक्स के जनक : ग्रेगर जॉन मेंडल 

हरित क्रांति के जनक: डॉ ई.एन. बुरलाॅग

हरित क्रांति के जनक (भारत): डॉ एम.एस. स्वामीनाथन

गोल्डन क्रांति के जनक : डॉ के.एल. चड्डा 

प्लांट पैथौलोजी के जनक : एंटोन डी बरी 

प्लांट पैथौलोजी के जनक (भारत में) : ईजे बटलर 

फसल चक्र के जनक : नाॅर फाॅरक 

वनस्पति विज्ञान (बाॅटनी )के जनक : थियो फ्रेंस्टस

पादप फिजियोलॉजी के जनक : स्टीफन हेल्स 

ऐन्टोमालोजी के जनक : विलियम किर्बी 

कृषि जोत (टीलैज) के जनक : जित्रौ टूल 

मृदा विज्ञान के जनक : वसीली वासिलिवेच डोकुचेव 

बाॅयोलोजी के जनक : अरस्तू 

हार्टिकल्चर के जनक (भारत) : एम. एच. मैरिगौडा 

कृषि मौसम विज्ञान के जनक : डी.एन. वालिया 

कृषि विस्तार (एक्सटेंशन) के जनक : सीमैन कन्नप 

कृषि रसायन के जनक : जस्टन वाॅन लेबिंग 

पादप प्रजनन के जनक (भारत) : डॉ बी.पी. पाल 

साइटोलॉजी के जनक : रॅाबर्ट हुक 

माइक्रोबायोलॉजी के जनक : ए.वी. लीवेनहाॅक 

प्रजनन प्रोधौगिक के जनक : पाॅल बर्ग

पादप टिसु कल्चर के जनक : जी. हैबरलैडस 

प्राकृतिक खेती के जनक : मसानोबु फुकुओका

जैविक खेती के जनक : अल्बर्ट हावर्ड 

गोल्डन राइस के जनक : डॉ एन्गो पोट्रीकस 

हाइब्रिड राइस के जनक : याॅन लोंगपीन्गस 

हाइब्रिड काॅटन के जनक : डॉ सी.टी. पटेल 

रिमोट सेंसिंग के जनक (भारत) : डॉ पी.आर. पिशरोती

धन्यवाद। इन तथ्यो को साझा करने पर मेरे साथ ही आप सभी को भी फायदेमंद साबित होगा। अपने सुझाव के लिए updateagriculture@gmail.com


और देखें भारत में कृषि क्रांतिया





Saturday, 21 March 2020

फसल वर्गीकरण : वानस्पतिक नाम

फसलों का वर्गीकरण , वानस्पतिक नाम 
मेरे ब्लोग में आपका स्वागत है। आज हम फसल वर्गीकरण के बारे में जानकारी साझा कर रहे हैं। 
कृषि फसलों को खाद्य फसलों, कृषि संगठनों - अनाज, दाल, फलियां, फल, सब्जियों आदि के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। कृषि फसलों के वर्गीकरण के बारे में जानकारी निम्न प्रकार से है। 
कृषि फसलों के श्रेणीवार वर्गीकरण
1. अनाज वर्गीय की फसलें
2. दलहन वर्गीय की फसलें
3. तिलहन वर्गीय की फसलें
4. रेशेवाली फसलें
5. चारा वर्गीय फसलें 
6. शुगर वर्गीय फसलें
7. फल सब्जी वर्गीय फसलें
8. गोभी सब्जी वर्गीय फसलें 
9. पत्ती , जड़ , तना (कन्द) वर्गीय फसलें

1. अनाज वर्गीय फसलें : इनमें अनाज वर्गीय में आने वाली फसलें उगाई जाती है। जैसे - 
• गेहूं ( ट्रिक्टिकम एस्टीवियम )
• धान ( औराइजा सैटाइवा )
• जौ ( हॅार्डियम वल्गेयर )
• बाजरा ( पैनीसिटम ओमेरिकोनम )
• मक्का ( जिया मेज )

2. दलहन वर्गीय फसलें : इनमें दाल वाली फसलें आती है। जैसे : 
• अरहर ( कैजेनस कजान )
• चना ( साइसर एरीटिनम )
• काला चना ( विग्ना मुन्गो ) 
• मसूर ( लैंस सिनारिसिस )
• लोबिया ( विग्ना उगिरकुलाटा )
• फ्रेंच बीन ( फैजोलस वल्गेरिस )

3. तिलहन वर्गीय फसलें : तिलहन वर्गीय फसले तेल के लिए उगाई जाती है। जैसे 
• सरसों ( ब्रेसिका जंसियन )
• मूंगफली ( अराचिस हाइपोगिया )
• अलसी ( लिनियम ओसिटेसिनीयम )
• तिल ( सीसमम इंडिकम ) 
• अरंडी ( रिकिनयस कम्युनियस )
•  सूरजमुखी ( हेलियसथस )
• सोयाबीन ( ग्लाइसिन मेक्स)

4. रेशेवाली फसलें : फाइबर फसलें उनकी फसलों के लिए उगाई जाने वाली फसलें हैं, इनका उपयोग कागज, कपड़े या रस्सी बनाने के लिए किया जाता है। जैसे -

• कपास ( गोसिपीयम )
• जूट ( कार्कोरस ओलिटोरियस & कार्कोरस कप्सुलरियस )

5. चारा वर्गीय फसलें : ये फसलें मुख्य चारे के खेती की जाती है। जैसे -

• बरसीम  ( ट्राइफोलियम अलेक्जेंड्रिनम ) 
• ज्वार ( सौरघम वल्गेअर )
• लूसर्न ( मेडिकागो सटिवा ) 
• जई ( अवेना सटिवा ) 

6. शुगर वर्गीय फसलें : शुगर वर्गीय फसलें  चीनी या शुगर उत्पादन के लिए उगाया जाता है। जैसे -

• चुकंदर ( बीटा वल्गरिस स्पी. )
• गन्ना ( सैकेरम ओफिसिनेरम ) 

7. फल सब्जी वर्गीय फसलें : इन वर्ग के अन्तर्गत आने वाली फसलें जैसे -

• टमाटर ( लाइकोपर्सिकान स्कुलेटम )
• बैंगन ( सोलेनम मेलोंगना )
• मिर्ची ( कैप्सिकम  अनुमम )
• कद्दु ( कुकरर्बिता मौसचाता )
• मटर ( पिसम सेटिवियम )
• भिण्डी ( एबेलमोसस एस्कुलेटस )
• खीरा ( कुकूमिस सैटाइवस )
• करेला ( मोमोरडिका चारनतिंरन )
• लोकी (लागेनारिया सिसेरिया )
• तोरई ( लफ्फा एकटंगुला रोक्स्ब .)
• तरबूज ( सिट्रूलस लैनाटस )
• खरबुजा ( कुुकुमिस मेलों एल. )
वेजिटेबल्स


8. गोभी सब्जी वर्गीय फसलें  :  इन वर्ग के अन्तर्गत आने वाली फसलें जैसे -

• फूलगोभी ( ब्रेसिका ओलेरासिया वर. बुट्रायटिस )
• पत्ता गोभी ( ब्रेसिका ओलेरासिया वर. कैपिटटा )

9. पत्ती , जड़ , तना (कन्द) वर्गीय फसलें : इन वर्ग के अन्तर्गत आने वाली फसलें जैसे -

• पालक ( स्पिनिया ओलेरसाइए )
• मेंथी ( ट्राइगोनेला फेनुम -ग्रेकेम )
• मूली ( रेफैनस सैटाइविस )
• शलजम ( ब्रेसिका रापा )
• गाजर ( डाकस कैरोटा )
• प्याज ( आलियम सिपियम )
• आलू  ( सोलेनम ट्यूबरोसम एल. )
• शकरकंदी ( इपोमेआ बाटटस एल. )

इस प्रकार कृषि फसल वर्गीकरण से फसलें को उनके उचित दाल, सब्जी , चारा, शुगर आदि अनुसार बुवाई कर उत्पादन लेने में किसानों को लाभ मिलेगा।


Friday, 20 March 2020

कीटनाशक: उपयोग के सरल दिशा निर्देश

कई प्रकार के कीट विभिन्न प्रकार की फसलों, सब्जियों और फलों के पेड़ों पर हमला करते हैं  ये पूरी फसल को खराब कर देते हैं।  इन कीटों को नष्ट करने के लिए आजकल कीटनाशकों का बहुतायत में उपयोग किया जाता है।  ये कीटनाशक जहरीले पदार्थों की श्रेणी में आते हैं।
कीटनाशक का छिड़काव करते समय सावधानियां बरतनी चाहिए जिससे कीट से नष्ट हो जाए और इसका प्रभाव प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मनुष्यों या जानवरों पर न पड़े।  इन कीटनाशकों के शरीर में प्रवेश करने पर परजीवी या अन्य सूजन संबंधी बीमारियां भी हो सकती हैं।  यदि ये दवाएं नीचे की ओर गिरती हैं और लंबे समय तक रहती हैं, तो यह भूमि की उर्वरता को नष्ट कर देती है।
कीटनाशक उपयोग के सरल दिशा निर्देश


कीटनाशक खरीदते समय दिशा निर्देश

 • कीटनाशक दवा को प्रमाणित और विश्वासनीय  संस्था से ही लेना चाहिए। 
• कीटनाशक के डिब्बे पर प्रभावी तिथि देखी जानी चाहिए। प्रभावी तिथि की समाप्ति के बाद, इन दवाओं को न तो खरीदा जाना चाहिए और न ही उपयोग किया जाना चाहिए।

  उपयोग करने के दिशा निर्देश 

• सुबह और शाम को पाउडर के रूप में कीटनाशक का उपयोग करने की सलाह दी जाती है 
• 12:00 से 2:00 समय के बीच छिड़काव नहीं किया जा सकता है। जोकि फसल और मनुष्य दोनों के लिए अच्छा नहीं रहता। गर्मी अधिक होने पर दोपहर में पौधे मुरझा जाते हैं और मनुष्य भी से प्रभावित हो सकते हैं 
 • कीटनाशकों करने वाले व्यक्ति पूरी तरह से स्वस्थ होना चाहिए, उसके शरीर पर कोई कटा हुआ या चोट नहीं लगी होना चाहिए ताकि कीटनाशक व्यक्ति के शरीर पर कोई प्रभाव न कर सके।
• कीटनाशक विषाक्तता निश्चित मात्रा में होनी चाहिए ताकि कीटो को रोका जा सके लेकिन मनुष्यों और जानवरों पर कोई प्रभाव नहीं पडे। 
  • प्रत्येक फसल के लिए कीटनाशक की मात्रा और प्रकार भिन्न होता है, इसलिए दवा और गलत मात्रा का छिड़काव अप्रभावी होता हैं। 
• फसल के लिए उपयुक्त कीटनाशक या घुलनशील या विभिन्न प्रकार के कीटनाशक के प्रकार का चयन करना भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
• कीटनाशक घोल में कुछ साबुन घोल या एक शैम्पू मिलाना उचित है।  यह दवाओं के प्रभाव को अधिक प्रभावी बनाता है। 

छिड़काव करते समय दिशा निर्देश

• कृषि विज्ञान के सलाहकारों या कृषि विज्ञान केंद्र के संयंत्र सुरक्षा वैज्ञानिक से सलाह लेना उपयोगी है, साथ ही कीटनाशक के उपयोग का सही समय जानने के बाद फसल और कीटनाशक नुकसान से बचा सकते हैं। 
  • दवा का छिड़काव करने से पहले छिड़काव उपकरण का अवलोकन किया जाना चाहिए क्योंकि यदि उपकरण में रिसाव होता है तो उपकरण को भली-भांति सुधरवाना चाहिए। 
•  छिड़काव करते हुए बीच बीच में आराम  करना भी फायदेमंद होता है, साथ ही कीटनाशक के छिड़काव के दौरान कोई भी खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। 
• छिड़काव करने से पहले कृषक को चश्मा, हाथों में रबर के दस्ताने, मुंह पर फेसमास्क (जो मुंह को ढंकता है और साँस भी ले सकता है) को आवश्यक निर्देश में कहा गया है।

 छिड़काव के बाद दिशा निर्देश

 • छिड़काव करने के बाद कपड़ों और साबुन से हाथों और पैरों को धोना चाहिए और कपड़े बदलने चाहिए। 
 • छिड़काव के दौरान किसी भी दुर्घटना के मामले में, प्राथमिक चिकित्सा तुरंत दी जानी चाहिए। 
• यदि दवा शरीर पर गिर जाती है तो दवा को निकालने के लिए साफ साबुन से कई बार धोया जाना चाहिए। 
• यदि कीटनाशक पेट में चला गया है, तो रोगी को पहले उल्टी करनी चाहिए और नमक के पानी या गर्म पानी से स्नान करना चाहिए। 
• यदि रोगी बेहोश या बेहोश हो जाता है तो तुरंत डॉक्टर को बुलाया जाना चाहिए। डॉक्टर की सलाह के अनुसार सही उपचार दिया जाना चाहिए। 

धन्यवाद

Thursday, 19 March 2020

फसल : महत्वपूर्ण किस्में

 नमस्कार । मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है। आज हम भारतीय कृषि में फसलों की उन्नत प्रजातियों के बारे में जानकारी साझा कर रहे हैं ।

  फसलों की उन्नत किस्में

 किस्में अच्छी फसल उन्नत प्रजाति पर निर्भर करती है। जिसकी बुवाई से पहले ही की उन्नत किस्मों की अच्छी समझ होनी किसान के लिए उत्साहित करती है और अच्छी उपज में कारगर साबित होती है। 

1.गेहूं :

एच.डी. 4530, एच.डी. 1925 , डब्ल्यू. एच.147
सोनालिका , कल्याण सोना (एच.डी.एम.1593) , जे.डब्ल्यू.1106 , सोनाली (एच पी 1633) , पी.बी.डब्ल्यू.65 , यू.पी.115 , रोहिणी (सीपीएएन-1676) , एच.यू डब्ल्यू-37 ,एच.यू.डब्ल्यू-213 , गोदावरी (एनआईडीडब्ल्यूसी -295), डीडब्ल्यूआर -17, एमपी -1142 (एसएनएचआईएचएल), एचडी -2581, पुसा बोल्ड (डब्ल्यूआर -544), एनडीडब्ल्यू -1067, मैक -6145, पोरोवा (कमरा 2824), राज 4037, एचडी -2864  , पीबीडब्लू -502, जीडब्ल्यू -366 राज, -4083 इत्यादि 
गेहूं

2.धान :

(भारत में पहली ड्राफ किस्म), IR-8, जया (ब्लास्ट रेसिस्टेंट), पद्मा, मशूरी, काकतीय, पूसा बसुमती, पूसा जलदीदन, लूनीस्री, रत्न, टी.के.एम-6 (स्टेम बोरर रेसिस्टेंट), कटरीबाग (तुंगरो प्रतिरोधी)।  ADT-27 (इंडिका x जपोनिका), सेंटोशॉन्ग (उच्च प्रोटीन सामग्री), डी-गी-वू-जेन, बाला (सूखा प्रतिरोधी), आईआर -20 (ब्लास्ट,  स्टीम बोरर, लीफहॉपर के लिए प्रतिरोधी) , पी.बी-1509, पी.बी-1401, पी.बी-1121, पी.बी-1, पी.बी-1718, की.के.एम-11, राजेंद्र कस्तूरी, राजेंद्र श्वेता, इत्यादि ।
धान

3 मक्का


गंगा-2 , गंगा-5, पी.ए.सी-101, शक्तिमान-3, शक्तिमान-4, विवेक-23, डी-765, अमर इत्यादि।

4 गन्ना
सी.ओ-0118, सी.ओ-98014, सी.ओ-0238, सी.ओ.एस-8436, सी.ओ.जे-85, सी.ओ.पंत-90223, सी.ओ.एच-2201, सी.ओ-997 इत्यादि ।

5 सोयाबीन :
पी.एस-1024, पी.एस-1029, इन्द्रा सोया-9, जे.एस-335, जे.एस-93-05, शिलाजीत, पूसा-16, पूसा-20, पूसा-24, पी.के-327, अंकुर, बिसरा सोय-1, ए.डी.टी-1, अहिल्या-1, अहिल्या-2, अहिल्या-4 इत्यादि।

6. मक्का :
गंगा-2 , गंगा-5, पी.ए.सी-101, शक्तिमान-3, शक्तिमान-4, विवेक-23, डी-765, अमर इत्यादि।

7 देशी चना
 पूसा-09, पूसा-212, पूसा-244, पूसा-240, पूसा-362, पूसा धारवाड़, पूसा-112, पूसा -372 इत्यादि।

 8 कबूली चना
पूसा-1003, पूसा चमत्कार, पूसा-1088, पूसा-1108, पूसा-2024, पूसा-209, गौरव , अजय, सदाबहार, प्रगति , पूसा-1053 इत्यादि।

9 आलू
कुफरी ज्योति, कुफरी अलंकार, कुफरी पुखराज, कुफरी बहार, कुफरी चिप्सोना , कुफरी चंद्रमुखी इत्यादि

10 मटर :
रचना, वी.एल मटर-1, वी.एल मटर-45,, अर्पणा, सपना, उत्तरा , प्रगति, हिरा , मुक्ता , बहार, एस.बी.एच-8 , पूसा-33 इत्यादि । 




Wednesday, 18 March 2020

भारतीय फसलों के मौसम व प्रकार : खरीफ, रबी और जायद



  • मस्कार । मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है। आज हम भारतीय कृषि मौसम में मौसम के बारे में जानकारी साझा कर रहे हैं। 

भारत में फसलों का मौसम व प्रकार : खरीफ, रबी और जायद 
भारत की फसलें ऋतुओं के आधार पर ही उगाई जाती है। खरीफ ऋतु, रबी ऋतु और जायद है। जिनमें दो प्रमुख फसल मौसम खरीफ मौसम और रबी मौसम हैं जो मानसून पर निर्भर करते हैं।  रबी और खरीफ मौसमों के बीच एक छोटा मौसम होता है जिसे ज़ैद (जायद) का मौसम कहा जाता है।  इन मौसम में पैदा होने वाली फसलें पानी की उपलब्धता और दिन की रोशनी की मात्रा से संबंधित होती हैं। भारत में उत्पादित कृषि फसलें प्रकृति में मौसमी हैं और मॉनसून पर अत्यधिक निर्भर हैं। 
खरीफ का मौसम : खरीफ की फसलों को ग्रीष्मकालीन फसलों के रूप में भी जाना जाता है। धान की फसल इसकी मुख्य फसल है। बरसात के मौसम में खरीफ की फसलों की बुवाई जून से शुरू होकर कटाई सितंबर तक पहुंचती है। 
मुख्य फसलें : धान, बाजरा, मक्का , गन्ना, ज्वार,  सोयाबीन, उड़द, जून , मूंग ,अरहर, कपास इत्यादि। 
नोट : महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश , पश्चिम बंगाल तमिलनाडु, असम , उड़िसा , आंध्र प्रदेश , केरल विधानसभा बिहार के तटीय क्षेत्र महत्त्वपूर्ण  चावल उत्पादक राज्य है। 
रबी का मौसम :
सर्दियों में बुवाई , वसंत में कटाई
 रबी की फसलों को सर्दी के शुरुआती दिनों में बुवाई की जाती है। आमतौर पर रबी फसलों की बुवाई अक्टुबर से लेकर नवंबर तक और दिसम्बर के मध्यम तक होती है। जिनमें छोटे दिन ओर कम बरसात कम सिंचाई फसल के जमाव व बढ़ोतरी के लिए अच्छा रहता है। रबी की फसल में गेहूं मुख्य फसल में आती है। 
मुख्य फसलें : गेहूं , सरसों , जौ , जई , चना , मटर , प्याज , आलू , पालक , मेन्थी , राई इत्यादि। 
नोट : पंजाब , हरियाणा , हिमाचल प्रदेश , जम्मू और कश्मीर, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश , राजस्थान, उत्तराखंड  रबी फसलों के महत्वपूर्ण उत्पादक हैं।
जायद का मौसम :  फसल बुवाई का समय मार्च ,फसल कटाई मई व जून के मध्यम तक होती है। जायद की फसल अधिकतर वर्षा पर निर्भर करती है। जिसकी बुवाई करने के लिए मानसून का  इंतजार ना कर के अन्य सिंचाई के साधनों के माध्यम से करना चाहिए। जायद की फसलों के जमाव व बढ़ोतरी के लिए गर्म दिन के साथ अधिक सूर्य के प्रकाश की आवश्यकता होती है। जायद की फसलों में मक्का व गन्ना मुख्य फसल है। 
मुख्य फसलें :  मक्का , गन्ना , सूरजमुखी , तरबूज, खीरा , ककड़ी , सब्जियां और चारा फसलें इत्यादि। 
नोट : तमिलनाडु , उत्तर प्रदेश , पंजाब , हरियाणा , गुजरात , मध्य प्रदेश जायद फसलों के महत्वपूर्ण उत्पादक हैं।
धन्यवाद। 

Tuesday, 17 March 2020

कारोनावायरस : प्रभावित पोल्ट्री, मत्स्य उद्योग

नमस्कार। मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है। आज हम कारोनावायरस से प्रभावित पोल्ट्री फार्मिंग व्यवसाय के बारे में चर्चा कर रहे हैं। 
कारोनावायरस से प्रभावित पोल्ट्री मत्स्य  पालन
देश में पोल्ट्री , मीट ओर मत्स्य उद्योग अफवाहों का शिकार हो रहे हैं । कोरोनोवायरस से अफवाह इतनी फैल गई है कि  मांसाहार के माध्यम से कोरोनोवायरस पैर पसार रहा है जिसके कारण पोल्ट्री, मीट ओर मत्स्य  उद्योग बहुत बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है जिसके चलते प्रतिदिन 1500-2000 करोड़ रुपए का भारी नुक़सान हो रहा है।  इन उधोगों से जुड़े हुए करीब करीब 5-10 करोड़ लोगों के व्यापार प्रभावित होकर काम काज ठप होने की कगार पर पहुंच गया है। जोकि चिकन मीट खाने से कारोना वायरस के प्रसार की गलत अफवाहों का सामना कर रहे हैं।
     पशुपालन, डेयरी और मत्स्य विभाग के अधिकारियों मुताबिक अंडा, चिकन मीट खाने से कारोना वायरस फैलने की अफवाह फैलाई जा रही है जबकि परीक्षणों में कोई वैज्ञानिक आधार पर प्रमाणित नहीं हुआ है ।
विभाग के अधिकारियों के अनुसार विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक पशु-पक्षी से मानव में कारोना वायरस के प्रसार का माध्यम की पुष्टि को नकारते हुए मानव से मानव में फैलने को बताया है।

   इन अफवाहों के कारण अफवाह ने पोल्ट्री, मीट और मत्स्य उद्योग को काफी नुकसान पहुंचाया है और किसानों को थोक मूल्य काफी कम मिल रहा है जोकि चिकन कीमतें 70 प्रतिशत तक गिर गई है।
साथ ही पोल्ट्री उधोगों में  मक्का , सोयाबीन, बाजरा आदि दानो की आपूर्ति ना होने के कारण मध्यम वर्ग लघु वर्गीय किसानों को भी प्रभावित किया है।
भारत का पोल्ट्री उद्योग एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का है और 50 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और 1.5 करोड़ लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार देता है।  इस प्रकार, पोल्ट्री उद्योग द्वारा देश में लगभग दो करोड़ लोगों को रोजगार मिलता है।

धन्यवाद 


Monday, 16 March 2020

फसल पद्धति

फसल पद्धति 
फसल उत्पादन में वृद्धि करने के लिए किसान को फसल पद्धति के अनुसार निश्चय समय में विभिन्न तरीके से फसलों को उगा सकते हैं । फसल पद्धति के अंतर्गत आने वाले तथ्यों को निम्न लिखे लेख से समझ सकते हैं 

1. एक कैलेंडर वर्ष में एक ही भूमि पर दो या दो से अधिक फसलें उगाना कहते हैं - एकाधिक फसल

 2. निश्चित पंक्ति व्यवस्था के साथ 2 या अधिक फसलों को एक साथ उगाना - इंटर क्रॉपिंग कहलाता है

3. साल-दर-साल जमीन के एक टुकड़े पर केवल एक ही फसल उगाना -मोनो क्रॉपिंग कहलाता है

4. एक खेती वर्ष में भूमि के एक ही टुकड़े पर कम या अधिक फसलों को उगाना - अनुक्रमिक फसल कहलाता है
5. खरीफ और रबी के मौसम के बीच की फसलों को उगाने को कहा जाता है - जायद फसल 

6. ऐसी फसलें जो मुख्य रूप से मिट्टी को ढकने के लिए उगाई जाती हैं और नमी बनाये रखना और क्षरण को कम करने के लिए उगाई जाती है - कवर फसल कहलाती हैं

7. उत्तर पूर्वी क्षेत्र के पहाड़ी इलाक़ों में कटाई और जलाने की खेती को कहा जाता है - झूम / खेती को स्थानांतरित करना

8. एक ही भूमि पर एक ही समय में विभिन्न ऊंचाइयों की फसलों को एक साथ उगाने की प्रणाली को कहा जाता है- मैल्टी मंजिला फसल
मल्टी मंजिला क्रॉपिंग का उदाहरण है - नारियल + काली मिर्च + कोको + अनानास




Sunday, 15 March 2020

पीएम किसान मान धन योजना के लिए पंजीकरण

प्रधानमंत्री किसान धन योजना के लिए पंजीकरण शुरू होता है, श्री कृष्ण भवन, नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा।  देश भर के किसानों को वृद्धावस्था पेंशन योजना में शामिल होने की अपील करते हुए, मंत्री ने कहा कि देश के छोटे और सीमांत किसानों के जीवन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से इस योजना की कल्पना की गई है।  मंत्री ने कहा कि परिचालन दिशानिर्देश राज्यों और कृषि सचिव श्री के साथ साझा किए गए हैं।  संजय अग्रवाल ने इस संबंध में राज्यों के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित की ताकि योजना की उचित जानकारी का प्रसार और त्वरित कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

 योजना की मुख्य विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए, श्री।  तोमर ने कहा कि 18 से 40 वर्ष के आयु वर्ग के किसानों के लिए यह योजना स्वैच्छिक और अंशदायी है और मासिक पेंशन रु।  60 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर उन्हें 3000 / - प्रदान किया जाएगा।  पेंशन निधि में किसानों को रु .5 से रु। 200 तक का मासिक योगदान देना होगा, जब तक कि वे सेवानिवृत्ति की तारीख यानी 60 वर्ष की आयु तक नहीं पहुँच जाते।  केंद्र सरकार पेंशन फंड में भी समान राशि का समान योगदान करेगी।  कोष में अलग-अलग योगदान करने पर पति / पत्नी को रु। 300 / - का अलग पेंशन पाने के लिए भी पात्र है।  भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) पेंशन निधि प्रबंधक और पेंशन भुगतान के लिए जिम्मेदार होगा।

 मंत्री ने कहा कि, सेवानिवृत्ति की तारीख से पहले किसान की मृत्यु के मामले में, पति या पत्नी मृतक किसान की शेष आयु तक शेष योगदान का भुगतान करके योजना में जारी रह सकते हैं।  यदि पति या पत्नी जारी रखने की इच्छा नहीं रखते हैं, तो किसान द्वारा ब्याज के साथ किए गए कुल योगदान का भुगतान जीवनसाथी को किया जाएगा।  यदि कोई पति या पत्नी नहीं है, तो ब्याज के साथ कुल योगदान नामांकित व्यक्ति को भुगतान किया जाएगा।  यदि किसान सेवानिवृत्ति की तारीख के बाद मर जाता है, तो पति या पत्नी को परिवार पेंशन के रूप में पेंशन का 50% प्राप्त होगा।  किसान और पति या पत्नी दोनों की मृत्यु के बाद, संचित कोष पेंशन कोष में वापस जमा किया जाएगा।  लाभार्थी स्वेच्छा से 5 वर्षों के नियमित योगदान के बाद योजना से बाहर निकलने का विकल्प चुन सकते हैं।  बाहर निकलने पर, उनके पूरे योगदान को LIC द्वारा प्रचलित बचत बैंक दरों के बराबर ब्याज के साथ वापस कर दिया जाएगा।

 किसान, जो पीएम-किसान योजना के लाभार्थी भी हैं, उनके पास उस योजना के लाभ से सीधे अपने योगदान की अनुमति देने का विकल्प होगा।  नियमित योगदान करने में चूक के मामले में, लाभार्थियों को निर्धारित ब्याज के साथ बकाया राशि का भुगतान करके योगदान को नियमित करने की अनुमति है।  योजना का प्रारंभिक नामांकन विभिन्न राज्यों में कॉमन सर्विस सेंटरों के माध्यम से किया जा रहा है।  बाद में पीएम-किसान राज्य नोडल अधिकारियों या किसी अन्य माध्यम से नामांकन की वैकल्पिक सुविधा या ऑनलाइन नामांकन भी उपलब्ध कराया जाएगा।  नामांकन मुफ्त है।  कॉमन सर्विस सेंटर प्रति नामांकन रू .30 / - का शुल्क लेंगे जो सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

 एलआईसी, बैंकों और सरकार की उचित शिकायत निवारण प्रणाली होगी।  योजना की निगरानी, ​​समीक्षा और संशोधन के लिए सचिवों की एक अधिकार प्राप्त समिति का भी गठन किया गया है।

 श्री तोमर ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री किसान निधि के तहत इस वर्ष के लिए 10 करोड़ लाभार्थियों का लक्ष्य हासिल किया जाएगा।  मंत्री ने कहा कि अब तक, 5, 88,77,194 और 3,40,93,837 किसानों के परिवारों ने क्रमशः पीएम-किसान योजना के तहत पहली और दूसरी किस्त का लाभ उठाया है।

 स्रोत: https: //pib.gov.in/